Thursday, November 25, 2010

राष्ट्रपति डॉ0 ऐ.पी.जे. अब्दुल कलाम के बचपन की कहानी ... उनकी ही जुबानी !

मैंने जिंदगी से ही सीख ली है और उससे क्रमश: आगे बढ़ना सीखा है..। बचपन बहुत ही साधारण था। मैंने मध्यमवर्गीय तमिल परिवार में (15 अक्टूबर 1931) जन्म लिया था रामेश्वरम में..। द्वीप जैसा छोटा सा शहर..प्राकृतिक छटा से भरपूर..। शायद इसीलिए प्रकृति से मेरा बहुत जुड़ाव रहा। मेरे पिता जैनुलाब्दीन न तो ज्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। वे नाविक थे और बहुत नियम के पक्के थे।
हम संयुक्त परिवार में थे। पाच भाई और पाच बहनें, चाचा के परिवार भी साथ में थे। मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकता कि घर में कितने लोग थे या मा कितने लोगों का खाना बनाती थीं। क्योंकि घर में तीन भरे-पूरे परिवारों के साथ-साथ बाहर के लोग भी हमारे साथ खाना खाते थे। घर में खुशिया भी थीं, तो मुश्किलें भी।
मेरे जीवन पर पिता का बहुत प्रभाव रहा। वे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार बहुत काम आए..। वे चारों वक्त की नमाज पढ़ते थे और जीवन में सच्चे इंसान थे। जब मैं आठ-नौ साल का था, मैं भी सुबह चार बजे उठता। ट्यूशन पढ़ने के बाद पिता के साथ नमाज पढ़ता, फिर कुरान शरीफ का अध्ययन करने के लिए अरेशिक स्कूल जाता था। मैं उसी उम्र में काम भी करने लगा था..। रामेश्वरम के रेलवे स्टेशन जाकर अखबार इकट्ठा करता था और रामेश्वरम की सड़कों पर बेचता था और घरों में पहुंचाता था। अखबार इकट्ठा करना कठिन था। उन दिनों धनुषकोड़ी से मेल ट्रेन गुजरती थी, जिसका वहा रुकना तय नहीं था। वहा चलती ट्रेन से अखबार के बंडल प्लेटफॉर्म पर यहा-वहा फेंके जाते थे।
एक तो मैं अपने भाइयों में छोटा था, दूसरे घर के लिए थोड़ी कमाई भी कर लेता था, इसलिए मा का प्यार मुझ पर कुछ ज्यादा ही था। मुझे अपने भाई-बहनों से दो रोटिया ज्यादा मिल जाती थीं। एक घटना याद आ रही है। मैं भाई-बहनों के साथ खाना खा रहा था। हमारे यहा चावल खूब होता था, इसलिए खाने में वही दिया जाता था, हा गेहूं पर राशनिंग थी। यानी रोटिया कम मिलती थी। जब मा ने मुझे रोटिया ज्यादा दे दीं, तो मेरे भाई ने एक बड़े सच का खुलासा किया। उन्होंने अलग ले जाकर मुझसे कहा कि मा के लिए एक भी रोटी नहीं बची और तुम्हें उन्होंने ज्यादा रोटिया दे दीं। मेरे भाई ने मुझे वह अपनी जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया था। यह सुनकर मैं मा से लिपटकर फूट-फूट कर रोया..।
मैं एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में आया, तो इसके पीछे मेरे पाचवीं कक्षा के अध्यापक सुब्रहमण्यम अय्यर की प्रेरणा जरूर थी। उन्होंने कक्षा में बताया था कि पक्षी कैसे उड़ता है? जब मैं यह नहीं समझ पाया, तो वे सभी बच्चों को लेकर समुद्र के किनारे ले गए। उस प्राकृतिक दृश्य में कई प्रकार के पक्षी थे, जो सागर के किनारे उतर रहे थे और उड़ रहे थे। उन्होंने समुद्री पक्षियों को दिखाया, जो झुंड में उड़ रहे थे। उन्होंने पक्षियों के उड़ने के बारे में साक्षात अनुभव कराया। व्यावहारिक प्रयोग से हमने जाना कि पक्षी किस प्रकार उड़ पाता है। मेरे लिए यह सामान्य घटना नहीं थी। पक्षी की वह उड़ान मुझमें समा गई थी। बाद में भी मुझे महसूस होता था कि मैं रामेश्वरम के समुद्र तट पर पक्षियों की उड़ान का अध्ययन कर रहा हूं। उसी समय मैंने तय कर लिया था कि उड़ान में करियर बनाऊंगा।

आशा है कि आज के दिन चाचा कलाम के बचपन की कहानी केवल बच्चो को ही नहीं हम सब को भी अपनी अपनी जिम्मेदारीयो के इमानदारी से पालन करने का पाठ सिखाएगी !

आप सब को बाल दिवस की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

Saturday, November 20, 2010

राष्ट्रीय प्रैस दिवस समारोहों का उद्धाटन राष्ट्रपति डॉ0 ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

राष्ट्रपति डॉ0 ऐ.पी.जे. अब्दुल कलाम 16 नवम्बर, 2006 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय प्रैस दिवस समारोहों का उद्धाटन करेंगे। इन समारोहों के तहत 16 तथा 17 नवम्बर, 2006 को विज्ञान भवन में एक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
16 नवम्बर, 2006 को भारतीय प्रैस परिषद अपनी स्थापना के 40 वर्ष पूरे करने जा रही है। 16 नवम्बर, 1966 को भारतीय प्रैस परिषद की स्थापना की गई थी। प्रचार माध्यमों में स्वयं नियंत्रण के तौर-तरीकों को बढावा देने और प्रैस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए भारतीय प्रैस परिषद की स्थापना की गई थी।
उदघाटन समारोह में सूचना और प्रसारण मंत्री श्री पी.आर.दासमुंशी तथा माननीय अतिथि के रूप में दिल्ली की मुख्यमंत्री, श्रीमती शीला दीक्षित भी मौजूद रहेंगी। उद्धाटन के बाद 15 से भी ज्यादा देशों के प्रतिनिधि वैश्विकरण के इस युग में पत्रकारिता, मूल्य और समाज विषय पर अपने-अपने विचार व्यक्त करेंगे। संगोष्ठी के दौरान प्रचार माध्यमों में स्व-नियंत्रण की भूमिका तथा मीडिया में नैतिकता विषयों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होगा तथा इस अवसर पर एक स्मारिका भी जारी की जाएगी। भारतीय प्रैस परिषद के तत्वावधान मे समारोहों के आयोजन के अलावा राज्य भी इस अवसर पर अलग से कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
राष्ट्रीय प्रैस परिषद की पूर्व संध्या पर माननीय प्रधानमंत्री, 15 नवम्बर, 2006 को सायं 4.30 बजे आईफैक्स भवन में प्रैस परिषद की प्रदर्शनी का उद्धाटन करेंगे। भावी समाज का इतिहास और मानवता विषय पर फोटो पत्रकारों के योगदान को इस प्रदर्शनी में दर्शाया जाएगा। 15 नवम्बर, 2006 को आयोजित इस समारोह में लोकसभा अध्यक्ष, श्री सोमनाथ चटर्जी माननीय अतिथि होंगे और मीडिया के लिए स्व-नियामक प्रणाली विषय पर एक सार-संग्रह का विमोचन करेंगे। प्रदर्शनी 16 से 18 नवम्बर, 2006 तक अपराह्न 1.00 बजे से सायं 7.00 बजे तक सर्व-साधारण के लिए खुली रहेगी।

Saturday, August 28, 2010

अपमानित हुए डॉ अब्दुल कलाम

जरा सोचिये हम कहाँ जा रहे है और हमें क्या हो गया है ? उसके बाद भी हम सभी गर्व से कहते है हम भारतीय है ... शर्म आनी चाहिए हमें हम सब को मैंने तो अपनी शर्म जाहिर कर दी अ़ब आपकी बारी है ... तारीख २१ ' इंदिरा गांधी अन्तराष्ट्रीय एयरपोटर् , .जनता के प्रतिनिधी कहे जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम , भारतीय मिसाईल कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले डॉ कलाम. जिन्होंने राष्ट्रपति पद ग्रहण कर भारतीय राष्ट्रपति पद का गौरव बढ़या अन्तराष्ट्रीय मंच पर देश को सम्मान दिलाया उनके साथ ऐसा अपमान जनक कृत्य .... शर्मशारकर कर दिया अपने ही देश में ..... देश के राष्ट्रपति को विश्व के सामने शर्मशार कर , इसकी देखा सीखी अब अगर दुसरे देश अपनी सुरक्षा के मद्दे नजर इससे आगे भी कर गुजरे तो इसमें उनकी क्या गलती है

पर बात यही ख़त्म नहीं होती हाल ही के महज २ महीने से देश में चल रहे घटना चक्र पर नजर डाले जो किसी से छुपी नहीं है , जैसे बिहार में ट्रेन में आग जनि ,उसके बाद पंजाब में सिखा गुरु को लेकर की गई तोडा फोड़ ,आग जनि ., और फिर ऊत्तर प्रदेश में हो रहा हंगामा ये सब किसी से छुपा नहीं है , ये सब भी कही न कही अपमान और दुर्व्यवहार से जुडी हुई ही थी तो क्या इन सबो का अपमान देश के अपमान से बड़ा है ? और तो और अभी ये घटना किसी कांग्रेसी या भाजपा के नेता के साथ घटी होती तो सारे देश में अपमान से स्वाभिमान की लहर दौड जाती और हाहाकार मच जाता , जगह - जगह विरोध . नारेबाजी ,चक्का जाम और न जाने क्या क्या होता आप सभी जानते है तो आखिर कोई ये बतायेगा की उसी देश के गौरवशील पूर्व राष्ट्रपति के अपमान के बाद स्वाभिमान के ठेकेदार कहाँ नदारद है कहाँ है वो देश प्रेमी, देश भक्त , कहाँ है राष्ट्रीयता की दुहाई देने वाले सभी राजनैतिक दल, वो सारे झंडे - डंडे जो हर स्वाभिमान की लडाई के गवाह है जिन्होंने सड़क से संसद तक सिर्फ यही काम किया है, कहाँ है वो लोग जो अपने नेता के के स्वाभिमान के लिए गोली खाने से लेकर पेडो पर चड़ने तक के करतब दिखाने से बाज नहीं आते ,या फिर इन सब की स्वाभिमानी सिर्फ प्रदेश ,प्रदेश के नेता या राजनैतिक दल तक ही सीमित है या फिर हम ये कहे की घटना उपरांत मिले वाला जवाब "की जाँच होगी" यही इनकी राष्ट्रीयता है . इस पर भी आप राष्ट्रीयता के मायने खोज रहे है तो पूर्व रेल मत्री को आज आप रेल में अपमानित कर के दिखा दे फिर देखिये राष्ट्रीयता आपको सहज ही दिख जायेगी ,

फिर भी मै यही कहुगा क्यों देश के पूर्व राष्ट्रपति के साथ अपने ही देश में दुर्व्यवहार होने पर कही नारे बाजी , सड़क जाम, विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ .... क्या हम इतने सभ्य , सहनशील .और संस्कारी हो गए है ? की अपने देश के पूर्व राष्ट्रपति के अपमान के बाद भी कुछ नहीं बोलेगे क्या आजादी के ६० सालो में हमने गाँधी को आज याद किया ? बहरहाल मैंने तो कभी नारेबाजी की नहीं जो करता हु वो आज भी किया और इस तरह मैंने अपना विरोध प्रदर्शन कर दिया है अब आपकी बारी है

आपके विचार आमंत्रित है

Thursday, July 29, 2010

एक पी.जे. अब्दुल कलाम डा - राष्ट्रपति और व्यवसायी

"धन्य नम्र हैं, क्योंकि वे इस दुनिया वारिस" बाइबिल का दावा है. भारत रत्न डॉ. Avul पाकिर Jainulabdeen अब्दुल कलाम एक विनम्र आत्मा, तमिलनाडु में रामेश्वरम में पैदा हुआ, 2002 में 71 वर्ष की उम्र में भारतीय संघ के अध्यक्ष जहाज करने के लिए गुलाब. हालांकि वह 71 था, वह एक 17 वर्षीय लड़के के एक उत्साह था. उसे बुलाओ एक दूरदर्शी के रूप में या एक एरोनॉटिकल इंजीनियर, वैज्ञानिक या एक, या एक मिसाइल आदमी, फिर भी वह और अधिक अपने मानव संबंधों के लिए लोकप्रिय है. वह हमेशा एक व्यक्ति जो वकालत के रूप में याद किया जाएगा सपने और विकास के लिए. डा. कलाम ने निश्चित रूप से भारत की कल्पना की अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. मैं उसे डॉक्टर के रूप में कहते हैं, वह विश्व भर में विश्वविद्यालयों से नहीं क्योंकि 30 डॉक्टरेट प्राप्त नहीं, क्योंकि वह अभी भी एक स्नातक है, इसलिए नहीं कि वह पद्म विभूषण या Bharth रत्न के एक प्राप्तकर्ता गया था क्योंकि वह तो उच्चतम बुलाया स्थिति आयोजित नहीं है, एक परमाणु वैज्ञानिक के रूप में उनकी भूमिका की वजह से नहीं, राष्ट्रपति की, लेकिन उनके प्रेरणादायक भाषण के लिए बच्चों को प्रेरित करने के लिए और उन्हें बड़ा सपना करने के लिए. वह के साथ युवा भारतीय समाज doctored उनके नीचे के इस 'दिल के भाषण से. वह खुद को 'पवित्र Thirukkural' और कहा कि निविदा दिल में जादू काम किया पढ़ कर प्रेरणा आकर्षित किया. वह सुनिश्चित करने के लिए एक चिकित्सक है, क्योंकि वह समाज शुद्ध है. अब्दुल कलाम पुस्तक 'भारत 2020 के माध्यम से अपने' दृष्टि प्रकट. किताब एक ज्ञान महाशक्ति में रणनीति है कि 2020 तक देश के विकास के मार्गदर्शन करेगा, डाला गया है. Dr.A.P.J. अब्दुल कलाम ने खुद के परमाणु कार्यक्रम में उनके नेतृत्व के माध्यम से राष्ट्र के विकास में भाग लिया. कलाम एक शिक्षक ख़ासकर था. डॉ. कलाम प्रथाओं शाकाहार और कहा कि केवल साथी प्राणियों के लिए उसकी दया सबूत. वह अपनी 'आत्मकथा के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए और आग के पंख' विज्ञान और प्रौद्योगिकी से लाभ पाने के बारे में एक धारणा आगे प्रेरित किया. डा. A.P.J. अब्दुल कलाम सिर्फ पदार्थ के एक आदमी और एक करिश्माई नेता नहीं है, लेकिन यह भी एक महात्मा अपने जीवन भर.



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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम - पीपुल्स राष्ट्रपति और पीपुल्स व्यवसायी

"धन्य नम्र हैं, क्योंकि वे इस दुनिया वारिस" बाइबिल का दावा है. भारत रत्न डॉ. Avul पाकिर Jainulabdeen अब्दुल कलाम एक विनम्र आत्मा, तमिलनाडु में रामेश्वरम में पैदा हुआ, 2002 में 71 वर्ष की उम्र में भारतीय संघ के अध्यक्ष जहाज करने के लिए गुलाब. हालांकि वह 71 था, वह एक 17 वर्षीय लड़के के एक उत्साह था.


डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम

Tuesday, July 27, 2010

डॉ. कलाम "मेरी माँ " 01 अगस्त 2008


1941 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, यह रामेश्वरम में हमारे परिवार के लिए मुश्किल समय था. मैं एक दस साल का लड़का था तब. युद्ध लगभग युद्ध के बादल से की थी रामेश्वरम के हमारे दरवाजे तक पहुँच था पहले से ही कोलंबो पहुँचे. लगभग सब कुछ खाद्य वस्तुओं में से एक के लिए कुछ भी दुर्लभ थे. हमारा एक बड़े संयुक्त परिवार था. हमारे परिवार का आकार पांच बेटे और पाँच बेटियों और जिनमें से तीन परिवारों था. मैं अपने घर में कभी भी तीन cradles देखने के लिए इस्तेमाल किया. मेरी दादी और माँ लगभग इस बड़े दल के प्रबंध थे. खुशी और उदासी से alternated घर में माहौल. मैं सुबह चार बजे उठना, नहाना और गणित सीखने के लिए मेरे शिक्षक Swamiyar के पास गया था. उन्होंने छात्रों अगर वे स्नान नहीं लिया था स्वीकार नहीं करेंगे. वह एक अद्वितीय गणित के शिक्षक था और वह करने के लिए स्वतंत्र ट्यूशन के लिए एक वर्ष में केवल पांच छात्रों लेने के लिए इस्तेमाल किया. मेरी माँ मुझसे पहले उठ उपयोग किया है, और मुझे स्नान दिया और मुझे ट्यूशन के लिए जाने के लिए तैयार किया. मैं 5:30 पर वापसी उपयोग करने के लिए जब मेरे पिता ने मुझे नमाज और कुरान शरीफ को ले अरबी स्कूल में सीखने के लिए प्रतीक्षा कर रहे होंगे. उसके बाद मैं रामेश्वरम रोड रेलवे स्टेशन जाने के लिए उपयोग किया है, तीन किलोमीटर दूर अखबार लेने के लिए. मद्रास धनुषकोडी मेल स्टेशन के माध्यम से पारित लेकिन बंद नहीं करेगा, क्योंकि यह युद्ध का समय था. अखबार के बंडल चल ट्रेन से मंच करने के लिए फेंक दिया जाएगा.
मैं कागज जमा और रामेश्वरम शहर के आसपास चलाने के लिए और पहले शहर में एक समाचार पत्र वितरित करता था. मेरे बड़े चचेरे भाई एजेंट जो श्रीलंका के लिए दूर बेहतर आजीविका की खोज में चला गया था. वितरण के बाद, मैं से 8 बजे घर आया करते थे. मेरी माँ ने मुझे अन्य बच्चों की तुलना में, क्योंकि मैं अध्ययन किया गया और एक साथ काम कर रहे एक विशेष कोटा के साथ एक सरल नाश्ता दे देंगे. स्कूल के बाद शाम को खत्म हो जाता है, फिर मैं Rameswaran आसपास के बकाया वसूली के लिए ग्राहकों से जाना जाएगा. मैं अभी भी एक घटना है जो मैं आपके साथ साझा करने के लिए चाहेंगे याद है. मैं एक जवान लड़के के रूप में चल रहा था, चल रहा है और सभी एक साथ पढ़ रही है. एक दिन, जब अपने सभी भाइयों और बहनों बैठे थे और खाने, मेरी माँ मुझे दे चपाती (भले ही हम चावल, गेहूं राशन था भक्षण करते हैं पर चला गया). जब मैं खाना खा चुका है, मेरे बड़े भाई ने मुझे निजी तौर पर बुलाया और डांटा "कलाम क्या तुम जानते हो क्या हो रहा था? आप रोटी खाने पर गया था, और माँ ने तुम्हें देने पर चला गया. वह अपने सभी chappatis आप को दी गई है. यह मुश्किल समय है. एक जिम्मेदार बेटा बनो और अपनी माँ "भूखा नहीं बना. पहली बार मैं एक कांप सनसनी था और मैं खुद पर नियंत्रण नहीं कर सके. मैं अपनी माँ के पास पहुंचा और उसे गले लगाया. मैं भी 5 वीं कक्षा में पढ़ रहा था, हालांकि, मैं अपने घर में एक खास जगह थी, क्योंकि मैं परिवार में पिछले लड़का था. वहाँ बिजली नहीं करता था. हमारे घर में मिट्टी के तेल के दीपक द्वारा जलाई गई थी वह भी बीच में 7 से 9 PM. मेरी माँ ने मुझे विशेष रूप से एक छोटे से मिट्टी के तेल के लैंप दिया ताकि मैं लिए 11 बजे तक अध्ययन कर सकते हैं. मैं अभी भी एक पूर्णिमा की रात जो चित्रण किया गया है में मेरी किताब "विंग्स ऑफ फायर 'में शीर्षक" माँ के साथ मेरी माँ याद है. "


 मां  "दिन जब मैं दस था मैं अब भी याद है, अपनी गोद में मेरे बड़े भाई और बहनों की ईर्ष्या के लिए सो रही है. यह पूर्णिमा की रात थी, मेरी दुनिया तुम ही माँ पता था!, मेरी माँ! आधी रात में जब मैं आँसू मेरे घुटने पर गिरने के साथ जाग उठा आप अपने बच्चे को, मेरी माँ के दर्द को जानता था. अपनी देखभाल के हाथ, नम्रता से दर्द दूर तुम्हारा प्यार, अपनी देखभाल, अपने विश्वास मुझे शक्ति दी, डर के बिना और उसकी शक्ति के साथ दुनिया का सामना करने के लिए. हम फिर महान प्रलय दिवस पर मिलेंगे. मेरी माँ! 

यह मेरी माँ जो तीन साल नब्बे रहते थे, प्यार की एक औरत है, और दिव्य प्रकृति के सभी एक महिला के ऊपर दया की एक महिला की कहानी है. मेरी माँ प्रदर्शन पाँच बार नमाज रोज. नमाज के दौरान, मेरी माँ हमेशा angelic देखा. हर बार मैं नमाज मैं प्रेरित किया गया था और चले गए के दौरान उसे देखा








डा. ए पी जे अब्दुल कलाम द्वारा

राष्ट्रपति भवन में कलाम की झोपड़ी तोड़ दी गई !!!!

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की विख्यात 'चिंतन कुटी' अब राष्ट्रपति भवन में नहीं दिखेगी।

मुगल गार्डन में बनी यह झोपड़ी हटा दी गई है। 
राष्ट्रपति भवन को उसके मूल स्वरूप में लाने का काम शुरू होने के बाद इस झोपड़ी को हटाया गया।

मणिपुरी शैली की यह झोपड़ी पूर्व राष्ट्रपति कलाम के कार्यकाल में बनाई गई थी। कलाम वहां रोज सुबह-शाम बैठते थे। कलाम प्यार से इसे 'चिंतन कुटी' (थिंकिंग हट)कहा करते थे। आगंतुकों को वह बताते थे कि उनकी दो किताबें इसी चिंतन कुटी के सोफे पर लिखी गई थीं।

इस झोपड़ी ने कलाम की रचनात्मकता को और धार दे दिया हो, पर पुनर्निर्माण के लिए बनाई गई विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की आंखों में यह झोपड़ी खटक गई। उनके मुताबिक लुटियन द्वारा डिजाइन की गई इंग्लिश और मुगल शैली के योग से बने इस अद्भुत स्थापत्य की शोभा को यह झोपड़ी कम कर रही थी।