Tuesday, October 11, 2011

कलाम के जूते उतरवाने को हिलेरी ने ठहराया था जायज, भारत को दी थी धमकी


अमेरिका ने भारत के पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्‍दुल कलाम की तलाशी को जायज ठहराया था जब वह कॉन्टिनेंटल एयरलाइंस के विमान पर सवार होने से पहले उनकी जांच की गई थी। यही नहीं अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने धमकी भी दी थी कि यदि आगे ऐसी जांच में रुकावट डाली गई तो अमेरिका भारत से अमेरिका जाने वाली सभी नॉन-स्‍टॉप विमानों की आवाजाही रोक देगा। खोजी वेबसाइट विकीलीक्‍स के गोपनीय संदेश से यह खुलासा हुआ है। क्लिंटन ने यह गोपनीय संदेश 27 नवंबर 2009 को नई दिल्‍ली स्थित अमेरिकी दूतावास को भेजा था।

21 अप्रैल 2009 को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पूर्व राष्ट्रपति कलाम को एक आम आदमी की तरह सिक्योरिटी चेक से गुजरना पड़ा था। कलाम को कॉन्टिनेंटल एयरलाइंस की फ्लाइट से नेवाक जाना था। कॉन्टिनेंटल एयरलाइन के ग्राउंड स्टाफ ने सुरक्षा का हवाला देते हुए कलाम की पूरी जांच की। यही नहीं उनका मोबाइल, पर्स और जूते उतार कर चेकिंग कराने के लिए भी कहा गया। पूरी तरह जांच करने के बाद ही कलाम को प्लेन में सवार होने की इज़ाजत दी गई। कलाम को चेक करने की ये पूरी कवायद प्रोटोकॉल को ताक पर रखकर की गई।
नियमों के मुताबिक देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और पूर्व प्रमुखों को एयरपोर्ट पर किसी भी तरह के सिक्योरिटी चेक से नहीं गुजरना होता। जबकि अमेरिका ने अपने ट्रांसपोर्टेशन सिक्‍योरिटी एडमिनिस्‍ट्रेशन (टीएसए) के नियमों का हवाला देते हुए कलाम की तलाशी को जायज ठहराया था जिसके तहत विमान में सवार होने से ठीक पहले एयरोब्रिज पर सुरक्षा जांच करना जरूरी है। हर एयरलाइन इस नियम का पालन करती है और इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जा सकती।

क्लिंटन ने अमेरिकी दूतावास से कलाम के मामले को भारत के सामने रखने पर जोर देते हुए कहा था, ‘अमेरिका की सुरक्षा को चिंता के मद्देनजर टीएसए ने सिर्फ मौजूदा राष्‍ट्र प्रमुखों को ऐसी जांच प्रक्रिया से मुक्‍त रखा है। टीएएस के निर्देशों का पालन नहीं करने वाले विमानों को अमेरिका में घुसने की इजाजत नहीं दी जाएगी।’

Saturday, January 29, 2011

Wednesday, January 26, 2011

अब्दुल कलाम की छवि नम्बर 1 गूगल मैं

सर्च इंजन गूगल मैं अब्दुल कलाम की  छवि  सेर्च करने पैर हमारा ब्लॉग नम्बर 1 पर आ रहा ही आपके सहयोग के लिए धनेयेवाद !



Tuesday, January 4, 2011

एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी ...!


http://t1.gstatic.com/images?q=tbn:zsUhimGzW7PUTM:http://salesathyderabad.com/blog/wp-content/uploads/2010/09/ABDUL-KALAM-285x300.jpg&t=1
जन्म - 15 अक्टूबर 1931उपलब्धियां - इस प्रख्यात वैज्ञानिक और इंजीनियर भी अवधि 2002 से भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में 2007 तक सेवा की. एपीजे अब्दुल कलाम दृष्टि, जो हमेशा देश के विकास के उद्देश्य से विचारों से भरा है एक आदमी है. वह मानता है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक और अधिक मुखर भूमिका निभाने की जरूरत है.
एक उल्लेखनीय वैज्ञानिक और इंजीनियर होने के अलावा, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की अवधि तक भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में 2002 2007 तक सेवा की. वह दृष्टि है, जो हमेशा देश के विकास के उद्देश्य से विचारों से भरा है और यह भी अक्सर भी भारत के मिसाइल मैन के रूप में संदर्भित की एक आदमी है. लोगों को प्यार करता था और डा. ए पी जे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति कि लोकप्रिय पीपुल्स राष्ट्रपति बुलाया गया था के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इतना सम्मान किया है. डा. ए पी जे अब्दुल कलाम की जीवनी के बारे में यहाँ पढ़ें.
ए पी जे अब्दुल कलाम 15 1931 अक्टूबर को तमिलनाडु के दक्षिण भारतीय राज्य में पैदा हुआ था और 30 के बारे में दुनिया भर में विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट प्राप्त की. वर्ष 1981 में भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में भारत रत्न प्रदान किया.सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन के लिए - - मिला है भारत रत्न से पहले भारत के सर्वोच्च पद के लिए नियुक्त लाने कलाम से पहले, वहाँ केवल दो राष्ट्रपतियों की गई है.
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, जो भी पहले वैज्ञानिक और राष्ट्रपति भवन की सीट पर कब्जा स्नातक के जीवन इतिहास के बारे में पर पढ़ें. महत्वपूर्ण विषयों पर उनके दृष्टिकोण में किया गया है उसके द्वारा प्रतिपादित 'भारत 2020' पुस्तक. यह कार्य योजना में मदद मिलेगी कि समय 2020 तक एक ज्ञान महाशक्ति में देश के विकास पर प्रकाश डाला गया. एक बात जिसके लिए वह पर्याप्त यश प्राप्त उसका स्पष्ट कथन है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक और अधिक मुखर भूमिका निभाने की जरूरत है.
और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भारत के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर एक के लिए एक भविष्य महाशक्ति के रूप में भारत पर जोर जगह रास्ते के रूप में अपने काम का संबंध है. राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान भी, ए पी जे कलाम ने भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में avid रुचि ली. वह भी आगे रखा गया है जैव प्रत्यारोपण की स्थापना के लिए एक परियोजना की योजना है.उन्होंने यह भी मालिकाना समाधान पर खुला स्रोत सॉफ़्टवेयर के एक उत्साही वकील से बाहर भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक लाभ मथना है.

Monday, January 3, 2011

ए पी जे अब्दुल कलाम

जन्म - 15 अक्टूबर 1931

उपलब्धियां -  इस प्रख्यात वैज्ञानिक और इंजीनियर भी अवधि 2002 से भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में 2007 तक सेवा की. एपीजे अब्दुल कलाम दृष्टि, जो हमेशा देश के विकास के उद्देश्य से विचारों से भरा है एक आदमी है. वह मानता है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक और अधिक मुखर भूमिका निभाने की जरूरत है.
एक उल्लेखनीय वैज्ञानिक और इंजीनियर होने के अलावा, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की अवधि तक भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में 2002 2007 तक सेवा की. वह दृष्टि है, जो हमेशा देश के विकास के उद्देश्य से विचारों से भरा है और यह भी अक्सर भी भारत के मिसाइल मैन के रूप में संदर्भित की एक आदमी है. लोगों को प्यार करता था और डा. ए पी जे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति कि लोकप्रिय पीपुल्स राष्ट्रपति बुलाया गया था के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इतना सम्मान किया है. डा. ए पी जे अब्दुल कलाम की जीवनी के बारे में यहाँ पढ़ें.
ए पी जे अब्दुल कलाम 15 1931 अक्टूबर को तमिलनाडु के दक्षिण भारतीय राज्य में पैदा हुआ था और 30 के बारे में दुनिया भर में विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट प्राप्त की. वर्ष 1981 में भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में भारत रत्न प्रदान किया. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन के लिए - - मिला है भारत रत्न से पहले भारत के सर्वोच्च पद के लिए नियुक्त लाने कलाम से पहले, वहाँ केवल दो राष्ट्रपतियों की गई है.
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, जो भी पहले वैज्ञानिक और राष्ट्रपति भवन की सीट पर कब्जा स्नातक के जीवन इतिहास के बारे में पर पढ़ें. महत्वपूर्ण विषयों पर उनके दृष्टिकोण में किया गया है उसके द्वारा प्रतिपादित 'भारत 2020' पुस्तक. यह कार्य योजना में मदद मिलेगी कि समय 2020 तक एक ज्ञान महाशक्ति में देश के विकास पर प्रकाश डाला गया. एक बात जिसके लिए वह पर्याप्त यश प्राप्त उसका स्पष्ट कथन है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक और अधिक मुखर 
भूमिका निभाने की जरूरत है.
और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भारत के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर एक के लिए एक भविष्य महाशक्ति के रूप में भारत पर जोर जगह रास्ते के रूप में अपने काम का संबंध है. राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान भी, ए पी जे कलाम ने भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में avid रुचि ली. वह भी आगे रखा गया है जैव प्रत्यारोपण की स्थापना के लिए एक परियोजना की योजना है. उन्होंने यह भी मालिकाना समाधान पर खुला स्रोत सॉफ़्टवेयर के एक उत्साही वकील से बाहर भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक लाभ मथना है. ! 





ए पी जे अब्दुल कलाम

Monday, November 29, 2010

वैज्ञानिकों के लिए प्रौद्योगिकी अनुसंधान

वृद्धि की है कि भारत को हासिल किया है अब तक पेटेंट कि देश के बाहर हो चुका है और यह भारत में वैज्ञानिकों के लिए समय है के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी के विकास में अग्रणी बनने पर आधारित है. ", अनुसंधान अब राष्ट्रीय हो सकता है, विशेष रूप से बुनियादी विज्ञान के क्षेत्र में होगा, करने के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा को पूरा करने में सक्षम हो" पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कहा कलाम अब्दुल.

होमी भाभा सभागार में वैज्ञानिकों और छात्रों को संबोधित करते हुए कलाम ने कहा है कि इसकी अनुसंधान, बुनियादी विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान में समृद्ध विरासत के साथ संस्थान ने देश के विकास और समृद्धि के उन्नयन में मदद कर सकता है.

कलाम हरी ऊर्जा पर जोर देते हुए कहा कि वैज्ञानिकों चंद्रमा आधारित सौर ऊर्जा या अंतरिक्ष शक्ति पर ध्यान केंद्रित के रूप में इसे गैर प्रदूषणकारी है चाहिए. "हम सौर ऊर्जा की सुरक्षित बाह्य अंतरिक्ष से मानव निवास के लिए पृथ्वी के प्रसारण पर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि पृथ्वी, चंद्रमा और मंगल अलग संस्थाओं लेकिन मानवता के लिए रणनीतिक संस्थाओं नहीं कर रहे हैं ".

बाहर वैज्ञानिकों के लिए एक मिशन बनाने में, कलाम ने आगे कार्बन नैनो ट्यूब, परमाणु बिजली उत्पादन थोरियम आधारित रिएक्टर, प्रोटिओमिक्स अनुसंधान, एकीकृत वैक्सीन विकास, एचआईवी / एड्स की रोकथाम, भूकंप पूर्वानुमान का उपयोग का उपयोग करके सौर फोटोवोल्टिक सेल दक्षता में वृद्धि के रूप में कुछ वैज्ञानिक चुनौतियों रखा, और वयस्क पर काम कोशिकाओं, नाल की स्टेम कोशिकाओं, और भ्रूण स्टेम कोशिकाओं स्टेम.

कलाम ASTROSAT, भारत की पहली बहु - तरंग खगोल उपग्रह है, जो बोर्ड पर शुरू किया जाएगा ध्रुवीय उपग्रह अप्रैल 2011 में प्रक्षेपण यान के एक मॉडल प्रस्तुत किया.

Thursday, November 25, 2010

राष्ट्रपति डॉ0 ऐ.पी.जे. अब्दुल कलाम के बचपन की कहानी ... उनकी ही जुबानी !

मैंने जिंदगी से ही सीख ली है और उससे क्रमश: आगे बढ़ना सीखा है..। बचपन बहुत ही साधारण था। मैंने मध्यमवर्गीय तमिल परिवार में (15 अक्टूबर 1931) जन्म लिया था रामेश्वरम में..। द्वीप जैसा छोटा सा शहर..प्राकृतिक छटा से भरपूर..। शायद इसीलिए प्रकृति से मेरा बहुत जुड़ाव रहा। मेरे पिता जैनुलाब्दीन न तो ज्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। वे नाविक थे और बहुत नियम के पक्के थे।
हम संयुक्त परिवार में थे। पाच भाई और पाच बहनें, चाचा के परिवार भी साथ में थे। मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकता कि घर में कितने लोग थे या मा कितने लोगों का खाना बनाती थीं। क्योंकि घर में तीन भरे-पूरे परिवारों के साथ-साथ बाहर के लोग भी हमारे साथ खाना खाते थे। घर में खुशिया भी थीं, तो मुश्किलें भी।
मेरे जीवन पर पिता का बहुत प्रभाव रहा। वे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार बहुत काम आए..। वे चारों वक्त की नमाज पढ़ते थे और जीवन में सच्चे इंसान थे। जब मैं आठ-नौ साल का था, मैं भी सुबह चार बजे उठता। ट्यूशन पढ़ने के बाद पिता के साथ नमाज पढ़ता, फिर कुरान शरीफ का अध्ययन करने के लिए अरेशिक स्कूल जाता था। मैं उसी उम्र में काम भी करने लगा था..। रामेश्वरम के रेलवे स्टेशन जाकर अखबार इकट्ठा करता था और रामेश्वरम की सड़कों पर बेचता था और घरों में पहुंचाता था। अखबार इकट्ठा करना कठिन था। उन दिनों धनुषकोड़ी से मेल ट्रेन गुजरती थी, जिसका वहा रुकना तय नहीं था। वहा चलती ट्रेन से अखबार के बंडल प्लेटफॉर्म पर यहा-वहा फेंके जाते थे।
एक तो मैं अपने भाइयों में छोटा था, दूसरे घर के लिए थोड़ी कमाई भी कर लेता था, इसलिए मा का प्यार मुझ पर कुछ ज्यादा ही था। मुझे अपने भाई-बहनों से दो रोटिया ज्यादा मिल जाती थीं। एक घटना याद आ रही है। मैं भाई-बहनों के साथ खाना खा रहा था। हमारे यहा चावल खूब होता था, इसलिए खाने में वही दिया जाता था, हा गेहूं पर राशनिंग थी। यानी रोटिया कम मिलती थी। जब मा ने मुझे रोटिया ज्यादा दे दीं, तो मेरे भाई ने एक बड़े सच का खुलासा किया। उन्होंने अलग ले जाकर मुझसे कहा कि मा के लिए एक भी रोटी नहीं बची और तुम्हें उन्होंने ज्यादा रोटिया दे दीं। मेरे भाई ने मुझे वह अपनी जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया था। यह सुनकर मैं मा से लिपटकर फूट-फूट कर रोया..।
मैं एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में आया, तो इसके पीछे मेरे पाचवीं कक्षा के अध्यापक सुब्रहमण्यम अय्यर की प्रेरणा जरूर थी। उन्होंने कक्षा में बताया था कि पक्षी कैसे उड़ता है? जब मैं यह नहीं समझ पाया, तो वे सभी बच्चों को लेकर समुद्र के किनारे ले गए। उस प्राकृतिक दृश्य में कई प्रकार के पक्षी थे, जो सागर के किनारे उतर रहे थे और उड़ रहे थे। उन्होंने समुद्री पक्षियों को दिखाया, जो झुंड में उड़ रहे थे। उन्होंने पक्षियों के उड़ने के बारे में साक्षात अनुभव कराया। व्यावहारिक प्रयोग से हमने जाना कि पक्षी किस प्रकार उड़ पाता है। मेरे लिए यह सामान्य घटना नहीं थी। पक्षी की वह उड़ान मुझमें समा गई थी। बाद में भी मुझे महसूस होता था कि मैं रामेश्वरम के समुद्र तट पर पक्षियों की उड़ान का अध्ययन कर रहा हूं। उसी समय मैंने तय कर लिया था कि उड़ान में करियर बनाऊंगा।

आशा है कि आज के दिन चाचा कलाम के बचपन की कहानी केवल बच्चो को ही नहीं हम सब को भी अपनी अपनी जिम्मेदारीयो के इमानदारी से पालन करने का पाठ सिखाएगी !

आप सब को बाल दिवस की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

Saturday, November 20, 2010

राष्ट्रीय प्रैस दिवस समारोहों का उद्धाटन राष्ट्रपति डॉ0 ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

राष्ट्रपति डॉ0 ऐ.पी.जे. अब्दुल कलाम 16 नवम्बर, 2006 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय प्रैस दिवस समारोहों का उद्धाटन करेंगे। इन समारोहों के तहत 16 तथा 17 नवम्बर, 2006 को विज्ञान भवन में एक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
16 नवम्बर, 2006 को भारतीय प्रैस परिषद अपनी स्थापना के 40 वर्ष पूरे करने जा रही है। 16 नवम्बर, 1966 को भारतीय प्रैस परिषद की स्थापना की गई थी। प्रचार माध्यमों में स्वयं नियंत्रण के तौर-तरीकों को बढावा देने और प्रैस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए भारतीय प्रैस परिषद की स्थापना की गई थी।
उदघाटन समारोह में सूचना और प्रसारण मंत्री श्री पी.आर.दासमुंशी तथा माननीय अतिथि के रूप में दिल्ली की मुख्यमंत्री, श्रीमती शीला दीक्षित भी मौजूद रहेंगी। उद्धाटन के बाद 15 से भी ज्यादा देशों के प्रतिनिधि वैश्विकरण के इस युग में पत्रकारिता, मूल्य और समाज विषय पर अपने-अपने विचार व्यक्त करेंगे। संगोष्ठी के दौरान प्रचार माध्यमों में स्व-नियंत्रण की भूमिका तथा मीडिया में नैतिकता विषयों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होगा तथा इस अवसर पर एक स्मारिका भी जारी की जाएगी। भारतीय प्रैस परिषद के तत्वावधान मे समारोहों के आयोजन के अलावा राज्य भी इस अवसर पर अलग से कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
राष्ट्रीय प्रैस परिषद की पूर्व संध्या पर माननीय प्रधानमंत्री, 15 नवम्बर, 2006 को सायं 4.30 बजे आईफैक्स भवन में प्रैस परिषद की प्रदर्शनी का उद्धाटन करेंगे। भावी समाज का इतिहास और मानवता विषय पर फोटो पत्रकारों के योगदान को इस प्रदर्शनी में दर्शाया जाएगा। 15 नवम्बर, 2006 को आयोजित इस समारोह में लोकसभा अध्यक्ष, श्री सोमनाथ चटर्जी माननीय अतिथि होंगे और मीडिया के लिए स्व-नियामक प्रणाली विषय पर एक सार-संग्रह का विमोचन करेंगे। प्रदर्शनी 16 से 18 नवम्बर, 2006 तक अपराह्न 1.00 बजे से सायं 7.00 बजे तक सर्व-साधारण के लिए खुली रहेगी।

Saturday, August 28, 2010

अपमानित हुए डॉ अब्दुल कलाम

जरा सोचिये हम कहाँ जा रहे है और हमें क्या हो गया है ? उसके बाद भी हम सभी गर्व से कहते है हम भारतीय है ... शर्म आनी चाहिए हमें हम सब को मैंने तो अपनी शर्म जाहिर कर दी अ़ब आपकी बारी है ... तारीख २१ ' इंदिरा गांधी अन्तराष्ट्रीय एयरपोटर् , .जनता के प्रतिनिधी कहे जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम , भारतीय मिसाईल कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले डॉ कलाम. जिन्होंने राष्ट्रपति पद ग्रहण कर भारतीय राष्ट्रपति पद का गौरव बढ़या अन्तराष्ट्रीय मंच पर देश को सम्मान दिलाया उनके साथ ऐसा अपमान जनक कृत्य .... शर्मशारकर कर दिया अपने ही देश में ..... देश के राष्ट्रपति को विश्व के सामने शर्मशार कर , इसकी देखा सीखी अब अगर दुसरे देश अपनी सुरक्षा के मद्दे नजर इससे आगे भी कर गुजरे तो इसमें उनकी क्या गलती है

पर बात यही ख़त्म नहीं होती हाल ही के महज २ महीने से देश में चल रहे घटना चक्र पर नजर डाले जो किसी से छुपी नहीं है , जैसे बिहार में ट्रेन में आग जनि ,उसके बाद पंजाब में सिखा गुरु को लेकर की गई तोडा फोड़ ,आग जनि ., और फिर ऊत्तर प्रदेश में हो रहा हंगामा ये सब किसी से छुपा नहीं है , ये सब भी कही न कही अपमान और दुर्व्यवहार से जुडी हुई ही थी तो क्या इन सबो का अपमान देश के अपमान से बड़ा है ? और तो और अभी ये घटना किसी कांग्रेसी या भाजपा के नेता के साथ घटी होती तो सारे देश में अपमान से स्वाभिमान की लहर दौड जाती और हाहाकार मच जाता , जगह - जगह विरोध . नारेबाजी ,चक्का जाम और न जाने क्या क्या होता आप सभी जानते है तो आखिर कोई ये बतायेगा की उसी देश के गौरवशील पूर्व राष्ट्रपति के अपमान के बाद स्वाभिमान के ठेकेदार कहाँ नदारद है कहाँ है वो देश प्रेमी, देश भक्त , कहाँ है राष्ट्रीयता की दुहाई देने वाले सभी राजनैतिक दल, वो सारे झंडे - डंडे जो हर स्वाभिमान की लडाई के गवाह है जिन्होंने सड़क से संसद तक सिर्फ यही काम किया है, कहाँ है वो लोग जो अपने नेता के के स्वाभिमान के लिए गोली खाने से लेकर पेडो पर चड़ने तक के करतब दिखाने से बाज नहीं आते ,या फिर इन सब की स्वाभिमानी सिर्फ प्रदेश ,प्रदेश के नेता या राजनैतिक दल तक ही सीमित है या फिर हम ये कहे की घटना उपरांत मिले वाला जवाब "की जाँच होगी" यही इनकी राष्ट्रीयता है . इस पर भी आप राष्ट्रीयता के मायने खोज रहे है तो पूर्व रेल मत्री को आज आप रेल में अपमानित कर के दिखा दे फिर देखिये राष्ट्रीयता आपको सहज ही दिख जायेगी ,

फिर भी मै यही कहुगा क्यों देश के पूर्व राष्ट्रपति के साथ अपने ही देश में दुर्व्यवहार होने पर कही नारे बाजी , सड़क जाम, विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ .... क्या हम इतने सभ्य , सहनशील .और संस्कारी हो गए है ? की अपने देश के पूर्व राष्ट्रपति के अपमान के बाद भी कुछ नहीं बोलेगे क्या आजादी के ६० सालो में हमने गाँधी को आज याद किया ? बहरहाल मैंने तो कभी नारेबाजी की नहीं जो करता हु वो आज भी किया और इस तरह मैंने अपना विरोध प्रदर्शन कर दिया है अब आपकी बारी है

आपके विचार आमंत्रित है

Thursday, July 29, 2010

एक पी.जे. अब्दुल कलाम डा - राष्ट्रपति और व्यवसायी

"धन्य नम्र हैं, क्योंकि वे इस दुनिया वारिस" बाइबिल का दावा है. भारत रत्न डॉ. Avul पाकिर Jainulabdeen अब्दुल कलाम एक विनम्र आत्मा, तमिलनाडु में रामेश्वरम में पैदा हुआ, 2002 में 71 वर्ष की उम्र में भारतीय संघ के अध्यक्ष जहाज करने के लिए गुलाब. हालांकि वह 71 था, वह एक 17 वर्षीय लड़के के एक उत्साह था. उसे बुलाओ एक दूरदर्शी के रूप में या एक एरोनॉटिकल इंजीनियर, वैज्ञानिक या एक, या एक मिसाइल आदमी, फिर भी वह और अधिक अपने मानव संबंधों के लिए लोकप्रिय है. वह हमेशा एक व्यक्ति जो वकालत के रूप में याद किया जाएगा सपने और विकास के लिए. डा. कलाम ने निश्चित रूप से भारत की कल्पना की अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. मैं उसे डॉक्टर के रूप में कहते हैं, वह विश्व भर में विश्वविद्यालयों से नहीं क्योंकि 30 डॉक्टरेट प्राप्त नहीं, क्योंकि वह अभी भी एक स्नातक है, इसलिए नहीं कि वह पद्म विभूषण या Bharth रत्न के एक प्राप्तकर्ता गया था क्योंकि वह तो उच्चतम बुलाया स्थिति आयोजित नहीं है, एक परमाणु वैज्ञानिक के रूप में उनकी भूमिका की वजह से नहीं, राष्ट्रपति की, लेकिन उनके प्रेरणादायक भाषण के लिए बच्चों को प्रेरित करने के लिए और उन्हें बड़ा सपना करने के लिए. वह के साथ युवा भारतीय समाज doctored उनके नीचे के इस 'दिल के भाषण से. वह खुद को 'पवित्र Thirukkural' और कहा कि निविदा दिल में जादू काम किया पढ़ कर प्रेरणा आकर्षित किया. वह सुनिश्चित करने के लिए एक चिकित्सक है, क्योंकि वह समाज शुद्ध है. अब्दुल कलाम पुस्तक 'भारत 2020 के माध्यम से अपने' दृष्टि प्रकट. किताब एक ज्ञान महाशक्ति में रणनीति है कि 2020 तक देश के विकास के मार्गदर्शन करेगा, डाला गया है. Dr.A.P.J. अब्दुल कलाम ने खुद के परमाणु कार्यक्रम में उनके नेतृत्व के माध्यम से राष्ट्र के विकास में भाग लिया. कलाम एक शिक्षक ख़ासकर था. डॉ. कलाम प्रथाओं शाकाहार और कहा कि केवल साथी प्राणियों के लिए उसकी दया सबूत. वह अपनी 'आत्मकथा के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए और आग के पंख' विज्ञान और प्रौद्योगिकी से लाभ पाने के बारे में एक धारणा आगे प्रेरित किया. डा. A.P.J. अब्दुल कलाम सिर्फ पदार्थ के एक आदमी और एक करिश्माई नेता नहीं है, लेकिन यह भी एक महात्मा अपने जीवन भर.



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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम - पीपुल्स राष्ट्रपति और पीपुल्स व्यवसायी

"धन्य नम्र हैं, क्योंकि वे इस दुनिया वारिस" बाइबिल का दावा है. भारत रत्न डॉ. Avul पाकिर Jainulabdeen अब्दुल कलाम एक विनम्र आत्मा, तमिलनाडु में रामेश्वरम में पैदा हुआ, 2002 में 71 वर्ष की उम्र में भारतीय संघ के अध्यक्ष जहाज करने के लिए गुलाब. हालांकि वह 71 था, वह एक 17 वर्षीय लड़के के एक उत्साह था.


डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम

Tuesday, July 27, 2010

डॉ. कलाम "मेरी माँ " 01 अगस्त 2008


1941 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, यह रामेश्वरम में हमारे परिवार के लिए मुश्किल समय था. मैं एक दस साल का लड़का था तब. युद्ध लगभग युद्ध के बादल से की थी रामेश्वरम के हमारे दरवाजे तक पहुँच था पहले से ही कोलंबो पहुँचे. लगभग सब कुछ खाद्य वस्तुओं में से एक के लिए कुछ भी दुर्लभ थे. हमारा एक बड़े संयुक्त परिवार था. हमारे परिवार का आकार पांच बेटे और पाँच बेटियों और जिनमें से तीन परिवारों था. मैं अपने घर में कभी भी तीन cradles देखने के लिए इस्तेमाल किया. मेरी दादी और माँ लगभग इस बड़े दल के प्रबंध थे. खुशी और उदासी से alternated घर में माहौल. मैं सुबह चार बजे उठना, नहाना और गणित सीखने के लिए मेरे शिक्षक Swamiyar के पास गया था. उन्होंने छात्रों अगर वे स्नान नहीं लिया था स्वीकार नहीं करेंगे. वह एक अद्वितीय गणित के शिक्षक था और वह करने के लिए स्वतंत्र ट्यूशन के लिए एक वर्ष में केवल पांच छात्रों लेने के लिए इस्तेमाल किया. मेरी माँ मुझसे पहले उठ उपयोग किया है, और मुझे स्नान दिया और मुझे ट्यूशन के लिए जाने के लिए तैयार किया. मैं 5:30 पर वापसी उपयोग करने के लिए जब मेरे पिता ने मुझे नमाज और कुरान शरीफ को ले अरबी स्कूल में सीखने के लिए प्रतीक्षा कर रहे होंगे. उसके बाद मैं रामेश्वरम रोड रेलवे स्टेशन जाने के लिए उपयोग किया है, तीन किलोमीटर दूर अखबार लेने के लिए. मद्रास धनुषकोडी मेल स्टेशन के माध्यम से पारित लेकिन बंद नहीं करेगा, क्योंकि यह युद्ध का समय था. अखबार के बंडल चल ट्रेन से मंच करने के लिए फेंक दिया जाएगा.
मैं कागज जमा और रामेश्वरम शहर के आसपास चलाने के लिए और पहले शहर में एक समाचार पत्र वितरित करता था. मेरे बड़े चचेरे भाई एजेंट जो श्रीलंका के लिए दूर बेहतर आजीविका की खोज में चला गया था. वितरण के बाद, मैं से 8 बजे घर आया करते थे. मेरी माँ ने मुझे अन्य बच्चों की तुलना में, क्योंकि मैं अध्ययन किया गया और एक साथ काम कर रहे एक विशेष कोटा के साथ एक सरल नाश्ता दे देंगे. स्कूल के बाद शाम को खत्म हो जाता है, फिर मैं Rameswaran आसपास के बकाया वसूली के लिए ग्राहकों से जाना जाएगा. मैं अभी भी एक घटना है जो मैं आपके साथ साझा करने के लिए चाहेंगे याद है. मैं एक जवान लड़के के रूप में चल रहा था, चल रहा है और सभी एक साथ पढ़ रही है. एक दिन, जब अपने सभी भाइयों और बहनों बैठे थे और खाने, मेरी माँ मुझे दे चपाती (भले ही हम चावल, गेहूं राशन था भक्षण करते हैं पर चला गया). जब मैं खाना खा चुका है, मेरे बड़े भाई ने मुझे निजी तौर पर बुलाया और डांटा "कलाम क्या तुम जानते हो क्या हो रहा था? आप रोटी खाने पर गया था, और माँ ने तुम्हें देने पर चला गया. वह अपने सभी chappatis आप को दी गई है. यह मुश्किल समय है. एक जिम्मेदार बेटा बनो और अपनी माँ "भूखा नहीं बना. पहली बार मैं एक कांप सनसनी था और मैं खुद पर नियंत्रण नहीं कर सके. मैं अपनी माँ के पास पहुंचा और उसे गले लगाया. मैं भी 5 वीं कक्षा में पढ़ रहा था, हालांकि, मैं अपने घर में एक खास जगह थी, क्योंकि मैं परिवार में पिछले लड़का था. वहाँ बिजली नहीं करता था. हमारे घर में मिट्टी के तेल के दीपक द्वारा जलाई गई थी वह भी बीच में 7 से 9 PM. मेरी माँ ने मुझे विशेष रूप से एक छोटे से मिट्टी के तेल के लैंप दिया ताकि मैं लिए 11 बजे तक अध्ययन कर सकते हैं. मैं अभी भी एक पूर्णिमा की रात जो चित्रण किया गया है में मेरी किताब "विंग्स ऑफ फायर 'में शीर्षक" माँ के साथ मेरी माँ याद है. "


 मां  "दिन जब मैं दस था मैं अब भी याद है, अपनी गोद में मेरे बड़े भाई और बहनों की ईर्ष्या के लिए सो रही है. यह पूर्णिमा की रात थी, मेरी दुनिया तुम ही माँ पता था!, मेरी माँ! आधी रात में जब मैं आँसू मेरे घुटने पर गिरने के साथ जाग उठा आप अपने बच्चे को, मेरी माँ के दर्द को जानता था. अपनी देखभाल के हाथ, नम्रता से दर्द दूर तुम्हारा प्यार, अपनी देखभाल, अपने विश्वास मुझे शक्ति दी, डर के बिना और उसकी शक्ति के साथ दुनिया का सामना करने के लिए. हम फिर महान प्रलय दिवस पर मिलेंगे. मेरी माँ! 

यह मेरी माँ जो तीन साल नब्बे रहते थे, प्यार की एक औरत है, और दिव्य प्रकृति के सभी एक महिला के ऊपर दया की एक महिला की कहानी है. मेरी माँ प्रदर्शन पाँच बार नमाज रोज. नमाज के दौरान, मेरी माँ हमेशा angelic देखा. हर बार मैं नमाज मैं प्रेरित किया गया था और चले गए के दौरान उसे देखा








डा. ए पी जे अब्दुल कलाम द्वारा

राष्ट्रपति भवन में कलाम की झोपड़ी तोड़ दी गई !!!!

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की विख्यात 'चिंतन कुटी' अब राष्ट्रपति भवन में नहीं दिखेगी।

मुगल गार्डन में बनी यह झोपड़ी हटा दी गई है। 
राष्ट्रपति भवन को उसके मूल स्वरूप में लाने का काम शुरू होने के बाद इस झोपड़ी को हटाया गया।

मणिपुरी शैली की यह झोपड़ी पूर्व राष्ट्रपति कलाम के कार्यकाल में बनाई गई थी। कलाम वहां रोज सुबह-शाम बैठते थे। कलाम प्यार से इसे 'चिंतन कुटी' (थिंकिंग हट)कहा करते थे। आगंतुकों को वह बताते थे कि उनकी दो किताबें इसी चिंतन कुटी के सोफे पर लिखी गई थीं।

इस झोपड़ी ने कलाम की रचनात्मकता को और धार दे दिया हो, पर पुनर्निर्माण के लिए बनाई गई विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की आंखों में यह झोपड़ी खटक गई। उनके मुताबिक लुटियन द्वारा डिजाइन की गई इंग्लिश और मुगल शैली के योग से बने इस अद्भुत स्थापत्य की शोभा को यह झोपड़ी कम कर रही थी।

कलाम की चिंतन झोपड़ी ध्वस्त

विशेष संवाददाता... नई दिल्ली, 16 जुलाई। ... राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन से पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की मणिपुरी शैली में निर्मित 'थिंकिंग हट' हटा दी गई है ताकि मुगल गार्डन को उसका पुराना स्वरूप फिर से लौटाया जा सके।

कलाम के लिए निर्मित यह 'हट' उनके कार्यकाल के दौरान बनाई गई थी जहां वे सुबह-शाम बैठकर चिंतन किया करते थे। वे प्राय: इसे प्यार से अपनी 'थिंकिंग हट' कहा करते थे और यहां आने वाले आगंतुकों को बताते थे कि उनकी दो किताबें इन्हीं सोफासेटों पर बैठकर लिखी गई हैं।


गौरतलब है कि राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन को एडविन ल्यूटियंस नामक डिजायनर ने तैयार किया था जो अंग्रेजी और मुगल कालीन कला का अद्भुत समन्वय था। मुगल गार्डन को उसका पुराना स्वरूप लौटाने के लिए गठित कमेटी ने यह भी सुझाव दिया है कि थिंकिंग हट के साथ कलाम द्वारा स्थापित मॉडर्न-डे म्यूजिकल फाउंटेन को भी गार्डन से हटा दिया जाए। राष्ट्रपति भवन की जीर्णोद्धार योजना एक महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है जिसके तहत रायसीना हिल स्थित उन सभी इमारतों का पुनर्रुद्धार किया जा रहा है जो कि स्वतंत्र भारत की अभूतपूर्व निशानियों के तौर पर विश्व भर में प्रसिद्ध है। कलाम की ओर से इस बारे में फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की गई है। इस पुनर्रूद्धार कार्य में तीन कमेटियों की जिम्मेदारी है लेकिन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की भी इसमें व्यक्तिगत रुचि बताई जा रही है।

Friday, July 9, 2010

मेरा भारत और एक छोटा सा प्रश्न

बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं. बस जी नहीं किया. इस बीच बड़ी बड़ी घटनायें हो गयीं भारत में. मैं कुछ लिखने के बजाय बस यह सोचती रह गयी कि क्या हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी भारत का सपना देखा था. अगर नहीं तो कहाँ चूक गये हम.  आज अन्तर्जाल पर ऐसे ही विचरते हुए श्री ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के एक लेख ने ध्यान आकर्षित किया, शीर्षक था–’भारतीय होने पर गर्व करें’. आज के समय में यदि राजनीति से जुड़े किसी व्यक्ति ने मेरे मानसपटल पर छाप छोड़ी है तो वे हैं हमारे माननीय राष्ट्रपति महोदय. अत्यंत ज्ञानी, विद्वान तथा अनुभवी श्री कलाम अपने ज्ञान, सकारात्मक एवं वैज्ञानिक सोच तथा विनम्र व्यवहार के कारण सदा ही मेरे लिये श्रद्धेय रहे हैं. उनके शब्दों ने मन में हमेशा एक आशा तथा ऊर्जा का संचार किया है. अत: उनके लेखन के प्रति मेरा सहज आकर्षण स्वाभाविक है. मुझे नहीं पता कि इस लेख को कितने लोगों ने पढ़ा है पर इस लेख को पढ़ कर मुझे ये अवश्य लगा कि  हर भारतीय को इसे पढ़ना चाहिये. अत: उनके इस लेख के कुछ अंश यहाँ प्रस्तुत कर रही हूँ जिन्होंने मुझे न सिर्फ़ अत्यधिक प्रभावित किया अपितु मेरी सोच को एक नयी दिशा दी.
” भारत को लेकर मेरे तीन दृष्टव्य हैं. हमारे इतिहास के तीन हज़ार सालों में दुनिया भर के लोगों ने हम पर आक्रमण किये हैं, हमारी ज़मीनें हथियायी हैं, हमारे दिमाग़ों पर विजय पायी है. सिकंदर के बाद से  ग्रीक, तुर्क, मुसलमान, पुर्तगाली, बर्तानी, फ़्रांसीसी तथा डच सभी आये, हमें लूटा और जो हमारा था वह ले के चले गये. किंतु इसके बाद भी हमने किसी राष्ट्र के साथ ऐसा नहीं किया. हमने कभी किसी पर विजय पाने की कोशिश नहीं की, उनकी ज़मीन, सभ्यता तथा इतिहास पर आधिपत्य स्थापित करने की चेष्टा नहीं की. अपना जीने का ढंग किसी पर नहीं थोपा. क्यों? क्योंकि हम दूसरों की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं.
इसीलिये भारत को लेकर मेरा पहला दृष्टव्य स्वतंत्रता से संबधित है. मुझे लगता है कि भारत को यह द्रष्टव्य १८५७ में मिला जब स्वतंत्रता की लड़ाई की शुरुआत हुई. हमें अपनी इस स्वतंत्रता की रक्षा करनी चाहिये, इसका सम्मान करना चाहिये. यदि हम स्वतंत्र नहीं है तो कोई हमारा सम्मान नहीं करेगा.
भारत को लेकर मेरा दूसरा दृष्टव्य प्रगति को लेकर है. ५० सालों से हम एक विकासशील देश हैं. अब समय आ चुका है कि हमें स्वयं को विकसित देश के रूप में देखना होगा. जी.डी.पी. की दृष्टि से हम विश्व के प्रथम पाँच राष्ट्रों में से हैं. अधिकांश क्षेत्रों में हमारी विकास दर १० % के लगभग है. हमारा गरीबी का स्तर गिरा है. हमारी उपलब्धियाँ विश्व स्तर पर पहचान पा रही हैं. इसके बाद भी हम में आत्म-विश्वास की कमी  है जो हम खुद को एक विकसित, आत्म निर्भर तथा आश्वस्त देश के रूप में नहीं देख पाते. क्या यह उचित है?
मेरा तीसरा द्रष्टव्य है कि भारत को विश्व के सामने खड़ा होना होगा. शक्तिशाली शक्ति का ही सम्मान करते हैं. हमें न सिर्फ़ सैन्य दृष्टि से अपितु आर्थिक दृष्टि से भी सुदृढ़ होना होगा. ये दोनों साथ-साथ चलते हैं.
 

……..
आण्विक ऊर्जा विभाग तथा डी.आर.डी.ओ. की हाल ही में ११ तथा १३ मई को हुए नाभिकीय परीक्षणों में महत्वपूर्ण भागीदारी रही. अपनी टीम के साथ इन परीक्षणों मे भाग लेने तथा विश्व को यह दिखा पाने कि भारत यह कर सकता है एवं अब हम एक विकासशील देश नहीं अपितु विकसित देशों में एक हैं, की खुशी मेरे लिये अतुलनीय है. इससे मुझे भारतीय होने पर बेहद गर्व हुआ. हमने ‘अग्नि’ के पुनरागमन के लिये भी एक अन्य ढाँचा तैयार किया है जिसके लिये हमने एक अत्यंत हलके पदार्थ का विकास किया है. बहुत ही हलका पदार्थ जिसे कार्बन-कार्बन कहते हैं.
एक दिन ‘निज़ाम इन्स्टिट्यूट ऑव़ मेडिकल साइंसज़’ के एक हड्डी रोग विशेषज्ञ मेरी प्रयोगशाला में आये. उन्होंने वह पदार्थ उठाया और पाया कि वह बहुत हल्का था. उसके बाद वह मुझे अपने अस्पताल ले गये, मरीज़ों से मिलवाने के लिये. वहाँ छोटे-छोटे लड़के और लड़कियाँ भारी भारी धात्विक कैलीपर पहने हुए थे. लगभग तीन-तीन किलो वज़न वाले कैलीपर पहन कर ये बच्चे किसी प्रकार अपने पैरों को घसीट रहे थे. डॉक्टर ने मुझसे कहा – ‘मेरे मरीज़ों का कष्ट दूर कर दीजिये’. मात्र तीन हफ़्ते में हमने ३०० ग्राम के वज़न वाले कैलीपर का निर्माण कर लिया. जब हम उन्हें लेकर अस्पताल गये तो बच्चे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर पाये. अब वे घिसटने की बजाय आराम से चल सकते थे. उनके माता-पिता के नेत्र हर्षातिरेक से भर आये. इस कार्य से मुझे स्वर्गीय-सुख मिला.
हम अपने देश में अपनी ही क्षमताओं और उपलब्धियों को पहचानने में क्यों हिचकिचाते हैं? हम एक अत्यंत गौरवशाली राष्ट्र हैं. हमारी सफलता की कितनी ही अद्भुत कहानियाँ हैं जिन्हें हम अनदेखा कर देते हैं. क्यों? हम विश्व में गेहूँ के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक हैं. हम चावल के भी दूसरे सबसे बड़े उत्पादक हैं. दुग्ध-उत्पादन में हम प्रथम स्थान पर हैं. ‘रिमोट सेन्सिंग सैटेलाइट’ के क्षेत्र में भी हम प्रथम हैं.
डॉ. सुदर्शन को देखिये. उन्होंने एक आदिवासी गाँव को स्व-पोषित आत्म-निर्भर इकाई में बदल दिया. ऐसे लाखों उदाहरण हैं किंतु हमारे मीडिया को मुख्यत: बुरी खबरों, असफलताओं तथा आपदाओं की धुन लगी रहती है. एक बार मैं तेल अवीव में था और इज़राइली समाचार पत्र पढ़ रहा था. यह दिन उस दिन के बाद का था जब बहुत से हमले और बमबारी हो के चुकी थी. बहुत से लोग काल का ग्रास बन चुके थे. हमस ने हमला किया था. किंतु समाचार पत्र के पहले पन्ने पर एक ज्यूइश सज्जन का चित्र था जिन्होंने पाँच साल में अपनी बंजर रेगिस्तान ज़मीन को हरे-भरे बाग़ मे बदल दिया. हर इंसान ने उठते ही ऐसी प्रेरणाप्रद तस्वीर देखी. हत्या, बमबारी तथा मृत्यु के भयावह समाचार भीतर के पन्नों में अन्य समाचारों के बीच दफ़्न थे.
भारत में हम सिर्फ़ मृत्यु, बीमारी, आतंकवाद तथा अपराध से संबंधित समाचार ही क्यों पढ़ते हैं? हम क्यों इतने नकारात्मक हैं? एक और प्रश्न- एक राष्ट्र के तौर पर हम विदेशी वस्तुओं से इतना प्रभावित क्यों हैं? हमें विदेशी टी.वी. चाहिये, विदेशी कपड़े चाहिये, विदेशी तकनीक चाहिये. हर आयात की गई वस्तु से इतना लगाव क्यों? क्या हमें इस बात का अहसास है कि आत्म-सम्मान आत्म-निर्भरता के साथ ही आता है. मैं हैदराबाद में एक भाषण दे रहा था जब एक १४ वर्ष की लड़की मेरा ऑटोग्राफ़ लेने आयी. मैनें उससे पूछा उसके जीवन का उद्देश्य क्या है : उसने कहा – ‘मैं विकसित भारत में रहना चाहती हूँ’. मुझे और आपको, उसके लिये, ये विकसित भारत बनाना  ही होगा.”
यह पूरा लेख आप यहाँ  पढ़ सकते हैं. इस लेख यदि हमें कोई प्रेरणा मिली तो उसे हमें हृदय तक सीमित नहीं रखना है, हमें कर्म करना होगा, राष्ट्र-सेवा के मौके ढूँढने होंगे. समय आ गया है कि आज की युवा पीढ़ी परिवर्तन लाने का बीड़ा उठाये. और यह हमारा विश्वास है कि जब हमारे देश कि लाखों-करोड़ों प्रतिभायें हाथ से हाथ मिला आगे बढ़ेंगी तो कोई शक्ति, कोई आपदा हमारे विकास का मार्ग नहीं रोक पायेगी.
इस के साथ आप सब से एक और प्रश्न करना चाहूँगी. एक बात को लेकर दुविधा में हूँ. कई बार अन्तर्जाल पर ऐसा कुछ दिख जाता है जो बहुत प्रेरणाप्रद लगता है. ऐसे में यह सोचती हूँ कि उसे चिट्ठे पर डालूँ य न डालूँ, क्योंकि वह मौलिक नहीं है. वैसे यह निजी सोच हो सकती है पर आप क्या कहते हैं? क्या नवीनता और मौलिकता को वरीयता दूँ या अगर कुछ अच्छा मिले तो सिर्फ़ बाँटने तथा औरों को भी वह दिशा दिखाने के उद्देश्य से यहाँ डालूँ, यह जानते हुए भी कि वह सामग्री और भी कहीं उपलब्ध है. आप अन्तत: क्या ढूँढते हैं किसी चिट्ठे पर?







Thursday, July 8, 2010

वैज्ञानिकों से दूर रहें राजनेता "अब्दुल कलाम"

मई 1974 में भारत का पहला  परमाणु परीक्षण में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सेथना ने राजनेताओं को सलाह दी है कि वो वैज्ञानिक मुद्दों से दूर रहें। इस मुद्दे पर राजनीति करने की जरूरत नहीं है। उन्‍होंने कहा, "जब हमने पहला परमाणु परीक्षण किया था, तब वहां कोई राजनेता नहीं था। वो एक कच्‍चा परीक्षण था। हम खुशकिस्‍मत है कि वो सब खत्‍म हो गया।"



गौरतलब है कि हाल ही में डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक डा. संथानम ने दावा किया था कि पोखरण में 1998 में हुए परमाणु परीक्षणों में से दूसरा परीक्षण सफल नहीं था, जिस पर बाद में डा. कलाम ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा था कि पोकरण द्वितीय पूरी तरह सफल था।
 
यही नहीं संथानम के इस खुलासे के बाद देश भर के राजनीतिक दलों ने तत्‍कालीन सत्‍ताधारी पार्टी राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन पर उंगलियां उठानी शुरू कर दी थीं। हालांकि बाद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी यह साफ कर दिया कि वे परीक्षण पूरी तरह सफल था।

'पोकरण 2 पर कुछ नहीं जानते कलाम'

नई दिल्‍ली। परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्‍यक्ष डा. होमी नुसेरवांजी सेथना ने पूर्व राष्‍ट्रपति व परमाणु वैज्ञानिक डा. एपीजे अब्‍दुल कलाम के खिलाफ टिप्‍पणी करते हुए कहा है 1998 में हुए पोखरण द्वितीय परीक्षण पर बोलने का उन्‍हें कोई अधिकार नहीं है।


सीएनएन-आईबीएन से बातचीत के दौरान डा. होमी ने कहा कि डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक के संथानम के उस दावे, जिसमें उन्‍होंने कहा था कि पोखरण में हुआ दूसरा परमाणु परीक्षण सफल नहीं था, पर कलाम को बोलने का कोई अधिकार नहीं। होमी ने कहा, "परमाणु विस्‍फोटक बनाने के बारे में वो (कलाम) क्‍या जानते हैं। वो कुछ नहीं जानते थे। राष्‍ट्रपति होने के नाते वो सिर्फ इस उपलब्धि में शामिल हुए।"

मैं सौ प्रतिशत देसी हूं ! "अब्दुल कलाम"

अबुल पाकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम ने तमिलनाडु के एक छोटे से तटीय शहर में अख़बार बेचने से लेकर भारत रत्न तक का लंबा सफ़र तय किया है और अब वे भारत के राष्ट्रपति पद तक पहुँचे हैं.
चेन्नई से क़रीब 300 किलोमीटर दूर रामेश्वरम में 10 साल के स्कूली बच्चे अब्दुल कलाम अपने ग़रीब परिवार के भरण पोषण के लिए हर सुबह अख़बार बेचा करते थे.और 56 साल बाद वही अब्दुल कलाम भारत के मिसाइल कार्यक्रम के जनक माने जाते हैं, अपनी सुरक्षा ख़ुद करने के कार्यक्रम के प्रेरणास्रोत हैं और भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न पाने के बाद अब वे देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हुए हैं.


अब तक अविवाहित पूरी तरह शाकाहारी प्रोफेसर कलाम को क़ुरान और गीता पर समान अधिकार है


और गीता के ही उपदेशों के अनुरूप उन्होंने हाल में कहा 'सपनों को विचारों में और उन विचारों को असलियत में बदलना चाहिए. हथियारों का आयात कर छोटा रास्ता मत अपनाइए. अपना काम ख़ुद करें.'


इस मूलमंत्र के साथ ही अब्दूल कलाम ने भारत के लिए ख़ुद ही हथियार विकसित करने के कार्यक्रम पर ज़ोर दिया.


उन्होंने कहा कि अमरीका के सुपर कंप्यूटर और रुस के क्रायोजेनिक अंतरिक्ष तकनीक देने से इनकार करने के बाद भारत ने परमाणु क्षमता विकसित करने के लिए ख़ुद ही अपना रास्ता तलाश किया है.


1998 में परमाणु परीक्षण करने के बाद उनसे एक अमरीकी पत्रकार ने पूछा कि क्या उन्होंने अमरीका में पढ़ाई की है.


इस पर अब्दुल कलाम ने कहा 'मैं सौ प्रतिशत देसी हूं.'

Tuesday, July 6, 2010

प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, जिन्हें चंद्र मिशन बहुत प्रिय है, ने शनिवार को चंद्रयान-1 पर भेजे गए टैरेन मैपिंग कैमरे से ली गई पृथ्वी की पहली तस्वीरों पर प्रसन्नता जताई ।

डॉ. कलाम देश के अंतरिक्ष कार्यक्रमों से गहराई से जुड़े रहे हैं । उन्होंने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, इसरो के अध्यक्ष जी. माधवन नायर ने उन्हें पृथ्वी की पहली तस्वीरें दिखाईं ।

  डॉ. कलाम ने कहा कि ये बहुत अच्छी तस्वीरें हैं । उन्होंने कहा कि इनसे संकेत मिलता है कि हमारा भविष्य कैसा हो सकता है ।
 
चंद्रमा मिशन के बारे में उन्होंने कहा कि हर भारतीय को मिशन की सफलता पर गर्व होना चाहिए ।

  भारत के प्रथम चालक रहित अंतरिक्ष यान, चंद्रयान-1 पर भेजे गए टैरेन मैपिंग कैमरे ने गहरे अंतरिक्ष से पृथ्वी की श्याम-श्वेत तस्वीरें ली हैं । इस कैमरे को इसरो के बैंगलूरू स्थित टेलीमिट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क के अंतरिक्ष यान नियंत्रण केंद्र से कई निर्देशों के जरिये चलाया गया ।

पहला चित्र पृथ्वी के ऊपर करीब 9,000 किमी और दूसरा चित्र 70,000 किमी की ऊंचाई से लिया गया ।