वृद्धि की है कि भारत को हासिल किया है अब तक पेटेंट कि देश के बाहर हो चुका है और यह भारत में वैज्ञानिकों के लिए समय है के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी के विकास में अग्रणी बनने पर आधारित है. ", अनुसंधान अब राष्ट्रीय हो सकता है, विशेष रूप से बुनियादी विज्ञान के क्षेत्र में होगा, करने के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा को पूरा करने में सक्षम हो" पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कहा कलाम अब्दुल.
होमी भाभा सभागार में वैज्ञानिकों और छात्रों को संबोधित करते हुए कलाम ने कहा है कि इसकी अनुसंधान, बुनियादी विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान में समृद्ध विरासत के साथ संस्थान ने देश के विकास और समृद्धि के उन्नयन में मदद कर सकता है.
कलाम हरी ऊर्जा पर जोर देते हुए कहा कि वैज्ञानिकों चंद्रमा आधारित सौर ऊर्जा या अंतरिक्ष शक्ति पर ध्यान केंद्रित के रूप में इसे गैर प्रदूषणकारी है चाहिए. "हम सौर ऊर्जा की सुरक्षित बाह्य अंतरिक्ष से मानव निवास के लिए पृथ्वी के प्रसारण पर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि पृथ्वी, चंद्रमा और मंगल अलग संस्थाओं लेकिन मानवता के लिए रणनीतिक संस्थाओं नहीं कर रहे हैं ".
बाहर वैज्ञानिकों के लिए एक मिशन बनाने में, कलाम ने आगे कार्बन नैनो ट्यूब, परमाणु बिजली उत्पादन थोरियम आधारित रिएक्टर, प्रोटिओमिक्स अनुसंधान, एकीकृत वैक्सीन विकास, एचआईवी / एड्स की रोकथाम, भूकंप पूर्वानुमान का उपयोग का उपयोग करके सौर फोटोवोल्टिक सेल दक्षता में वृद्धि के रूप में कुछ वैज्ञानिक चुनौतियों रखा, और वयस्क पर काम कोशिकाओं, नाल की स्टेम कोशिकाओं, और भ्रूण स्टेम कोशिकाओं स्टेम.
कलाम ASTROSAT, भारत की पहली बहु - तरंग खगोल उपग्रह है, जो बोर्ड पर शुरू किया जाएगा ध्रुवीय उपग्रह अप्रैल 2011 में प्रक्षेपण यान के एक मॉडल प्रस्तुत किया.
Monday, November 29, 2010
Thursday, November 25, 2010
राष्ट्रपति डॉ0 ऐ.पी.जे. अब्दुल कलाम के बचपन की कहानी ... उनकी ही जुबानी !
मैंने जिंदगी से ही सीख ली है और उससे क्रमश: आगे बढ़ना सीखा है..। बचपन बहुत ही साधारण था। मैंने मध्यमवर्गीय तमिल परिवार में (15 अक्टूबर 1931) जन्म लिया था रामेश्वरम में..। द्वीप जैसा छोटा सा शहर..प्राकृतिक छटा से भरपूर..। शायद इसीलिए प्रकृति से मेरा बहुत जुड़ाव रहा। मेरे पिता जैनुलाब्दीन न तो ज्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। वे नाविक थे और बहुत नियम के पक्के थे।
हम संयुक्त परिवार में थे। पाच भाई और पाच बहनें, चाचा के परिवार भी साथ में थे। मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकता कि घर में कितने लोग थे या मा कितने लोगों का खाना बनाती थीं। क्योंकि घर में तीन भरे-पूरे परिवारों के साथ-साथ बाहर के लोग भी हमारे साथ खाना खाते थे। घर में खुशिया भी थीं, तो मुश्किलें भी।
मेरे जीवन पर पिता का बहुत प्रभाव रहा। वे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार बहुत काम आए..। वे चारों वक्त की नमाज पढ़ते थे और जीवन में सच्चे इंसान थे। जब मैं आठ-नौ साल का था, मैं भी सुबह चार बजे उठता। ट्यूशन पढ़ने के बाद पिता के साथ नमाज पढ़ता, फिर कुरान शरीफ का अध्ययन करने के लिए अरेशिक स्कूल जाता था। मैं उसी उम्र में काम भी करने लगा था..। रामेश्वरम के रेलवे स्टेशन जाकर अखबार इकट्ठा करता था और रामेश्वरम की सड़कों पर बेचता था और घरों में पहुंचाता था। अखबार इकट्ठा करना कठिन था। उन दिनों धनुषकोड़ी से मेल ट्रेन गुजरती थी, जिसका वहा रुकना तय नहीं था। वहा चलती ट्रेन से अखबार के बंडल प्लेटफॉर्म पर यहा-वहा फेंके जाते थे।
एक तो मैं अपने भाइयों में छोटा था, दूसरे घर के लिए थोड़ी कमाई भी कर लेता था, इसलिए मा का प्यार मुझ पर कुछ ज्यादा ही था। मुझे अपने भाई-बहनों से दो रोटिया ज्यादा मिल जाती थीं। एक घटना याद आ रही है। मैं भाई-बहनों के साथ खाना खा रहा था। हमारे यहा चावल खूब होता था, इसलिए खाने में वही दिया जाता था, हा गेहूं पर राशनिंग थी। यानी रोटिया कम मिलती थी। जब मा ने मुझे रोटिया ज्यादा दे दीं, तो मेरे भाई ने एक बड़े सच का खुलासा किया। उन्होंने अलग ले जाकर मुझसे कहा कि मा के लिए एक भी रोटी नहीं बची और तुम्हें उन्होंने ज्यादा रोटिया दे दीं। मेरे भाई ने मुझे वह अपनी जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया था। यह सुनकर मैं मा से लिपटकर फूट-फूट कर रोया..।
मैं एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में आया, तो इसके पीछे मेरे पाचवीं कक्षा के अध्यापक सुब्रहमण्यम अय्यर की प्रेरणा जरूर थी। उन्होंने कक्षा में बताया था कि पक्षी कैसे उड़ता है? जब मैं यह नहीं समझ पाया, तो वे सभी बच्चों को लेकर समुद्र के किनारे ले गए। उस प्राकृतिक दृश्य में कई प्रकार के पक्षी थे, जो सागर के किनारे उतर रहे थे और उड़ रहे थे। उन्होंने समुद्री पक्षियों को दिखाया, जो झुंड में उड़ रहे थे। उन्होंने पक्षियों के उड़ने के बारे में साक्षात अनुभव कराया। व्यावहारिक प्रयोग से हमने जाना कि पक्षी किस प्रकार उड़ पाता है। मेरे लिए यह सामान्य घटना नहीं थी। पक्षी की वह उड़ान मुझमें समा गई थी। बाद में भी मुझे महसूस होता था कि मैं रामेश्वरम के समुद्र तट पर पक्षियों की उड़ान का अध्ययन कर रहा हूं। उसी समय मैंने तय कर लिया था कि उड़ान में करियर बनाऊंगा।
आशा है कि आज के दिन चाचा कलाम के बचपन की कहानी केवल बच्चो को ही नहीं हम सब को भी अपनी अपनी जिम्मेदारीयो के इमानदारी से पालन करने का पाठ सिखाएगी !
आप सब को बाल दिवस की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
हम संयुक्त परिवार में थे। पाच भाई और पाच बहनें, चाचा के परिवार भी साथ में थे। मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकता कि घर में कितने लोग थे या मा कितने लोगों का खाना बनाती थीं। क्योंकि घर में तीन भरे-पूरे परिवारों के साथ-साथ बाहर के लोग भी हमारे साथ खाना खाते थे। घर में खुशिया भी थीं, तो मुश्किलें भी।
मेरे जीवन पर पिता का बहुत प्रभाव रहा। वे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार बहुत काम आए..। वे चारों वक्त की नमाज पढ़ते थे और जीवन में सच्चे इंसान थे। जब मैं आठ-नौ साल का था, मैं भी सुबह चार बजे उठता। ट्यूशन पढ़ने के बाद पिता के साथ नमाज पढ़ता, फिर कुरान शरीफ का अध्ययन करने के लिए अरेशिक स्कूल जाता था। मैं उसी उम्र में काम भी करने लगा था..। रामेश्वरम के रेलवे स्टेशन जाकर अखबार इकट्ठा करता था और रामेश्वरम की सड़कों पर बेचता था और घरों में पहुंचाता था। अखबार इकट्ठा करना कठिन था। उन दिनों धनुषकोड़ी से मेल ट्रेन गुजरती थी, जिसका वहा रुकना तय नहीं था। वहा चलती ट्रेन से अखबार के बंडल प्लेटफॉर्म पर यहा-वहा फेंके जाते थे।
एक तो मैं अपने भाइयों में छोटा था, दूसरे घर के लिए थोड़ी कमाई भी कर लेता था, इसलिए मा का प्यार मुझ पर कुछ ज्यादा ही था। मुझे अपने भाई-बहनों से दो रोटिया ज्यादा मिल जाती थीं। एक घटना याद आ रही है। मैं भाई-बहनों के साथ खाना खा रहा था। हमारे यहा चावल खूब होता था, इसलिए खाने में वही दिया जाता था, हा गेहूं पर राशनिंग थी। यानी रोटिया कम मिलती थी। जब मा ने मुझे रोटिया ज्यादा दे दीं, तो मेरे भाई ने एक बड़े सच का खुलासा किया। उन्होंने अलग ले जाकर मुझसे कहा कि मा के लिए एक भी रोटी नहीं बची और तुम्हें उन्होंने ज्यादा रोटिया दे दीं। मेरे भाई ने मुझे वह अपनी जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया था। यह सुनकर मैं मा से लिपटकर फूट-फूट कर रोया..।
मैं एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में आया, तो इसके पीछे मेरे पाचवीं कक्षा के अध्यापक सुब्रहमण्यम अय्यर की प्रेरणा जरूर थी। उन्होंने कक्षा में बताया था कि पक्षी कैसे उड़ता है? जब मैं यह नहीं समझ पाया, तो वे सभी बच्चों को लेकर समुद्र के किनारे ले गए। उस प्राकृतिक दृश्य में कई प्रकार के पक्षी थे, जो सागर के किनारे उतर रहे थे और उड़ रहे थे। उन्होंने समुद्री पक्षियों को दिखाया, जो झुंड में उड़ रहे थे। उन्होंने पक्षियों के उड़ने के बारे में साक्षात अनुभव कराया। व्यावहारिक प्रयोग से हमने जाना कि पक्षी किस प्रकार उड़ पाता है। मेरे लिए यह सामान्य घटना नहीं थी। पक्षी की वह उड़ान मुझमें समा गई थी। बाद में भी मुझे महसूस होता था कि मैं रामेश्वरम के समुद्र तट पर पक्षियों की उड़ान का अध्ययन कर रहा हूं। उसी समय मैंने तय कर लिया था कि उड़ान में करियर बनाऊंगा।
आशा है कि आज के दिन चाचा कलाम के बचपन की कहानी केवल बच्चो को ही नहीं हम सब को भी अपनी अपनी जिम्मेदारीयो के इमानदारी से पालन करने का पाठ सिखाएगी !
आप सब को बाल दिवस की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
Saturday, November 20, 2010
राष्ट्रीय प्रैस दिवस समारोहों का उद्धाटन राष्ट्रपति डॉ0 ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
राष्ट्रपति डॉ0 ऐ.पी.जे. अब्दुल कलाम 16 नवम्बर, 2006 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय प्रैस दिवस समारोहों का उद्धाटन करेंगे। इन समारोहों के तहत 16 तथा 17 नवम्बर, 2006 को विज्ञान भवन में एक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
16 नवम्बर, 2006 को भारतीय प्रैस परिषद अपनी स्थापना के 40 वर्ष पूरे करने जा रही है। 16 नवम्बर, 1966 को भारतीय प्रैस परिषद की स्थापना की गई थी। प्रचार माध्यमों में स्वयं नियंत्रण के तौर-तरीकों को बढावा देने और प्रैस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए भारतीय प्रैस परिषद की स्थापना की गई थी।
उदघाटन समारोह में सूचना और प्रसारण मंत्री श्री पी.आर.दासमुंशी तथा माननीय अतिथि के रूप में दिल्ली की मुख्यमंत्री, श्रीमती शीला दीक्षित भी मौजूद रहेंगी। उद्धाटन के बाद 15 से भी ज्यादा देशों के प्रतिनिधि वैश्विकरण के इस युग में पत्रकारिता, मूल्य और समाज विषय पर अपने-अपने विचार व्यक्त करेंगे। संगोष्ठी के दौरान प्रचार माध्यमों में स्व-नियंत्रण की भूमिका तथा मीडिया में नैतिकता विषयों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होगा तथा इस अवसर पर एक स्मारिका भी जारी की जाएगी। भारतीय प्रैस परिषद के तत्वावधान मे समारोहों के आयोजन के अलावा राज्य भी इस अवसर पर अलग से कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
राष्ट्रीय प्रैस परिषद की पूर्व संध्या पर माननीय प्रधानमंत्री, 15 नवम्बर, 2006 को सायं 4.30 बजे आईफैक्स भवन में प्रैस परिषद की प्रदर्शनी का उद्धाटन करेंगे। भावी समाज का इतिहास और मानवता विषय पर फोटो पत्रकारों के योगदान को इस प्रदर्शनी में दर्शाया जाएगा। 15 नवम्बर, 2006 को आयोजित इस समारोह में लोकसभा अध्यक्ष, श्री सोमनाथ चटर्जी माननीय अतिथि होंगे और मीडिया के लिए स्व-नियामक प्रणाली विषय पर एक सार-संग्रह का विमोचन करेंगे। प्रदर्शनी 16 से 18 नवम्बर, 2006 तक अपराह्न 1.00 बजे से सायं 7.00 बजे तक सर्व-साधारण के लिए खुली रहेगी।
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